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इंसानों से अब वन्यजीवों में कोरोना संक्रमण का खतरा

केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय और जू-अथॉरिटी ने चेताया, वन्यजीवन पर मंडराया खतरा।

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पन्ना. कारोना के कहर से इंसानी जीवन तो संकट में है ही, अब वन्य जीवों पर भी संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इंसानों से कोरोना वायरस का संक्रमण वन्य जीवों में हो सकता है।

चिंता में विशेषज्ञ
एक शेर की कोरोना से मौत की पुष्टि ने विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। मंत्रालय ने जगह का नाम तो नहीं बताया है। हालांकि मध्यप्रदेश के किसी भी हिस्से से वन्यजीवों में कोरोना संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। मंत्रालय ने एक शेर की कोरोना संक्रमण से मौत होते की पुष्टि करते हुए देश के सभी नेशनल पार्क, सेंचुरी और संरक्षित क्षेत्र के अधिकारियों को एड्वायजरी जारी कर इंसानों से वन्य जीवों को दूर रखने और वायरस से सुरक्षा के तमाम उपाय किये जाने के निर्देश दिये हैं।

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यह पहले मौका है जब भारत में इंसान से वन्यजीव में संक्रमण की आशंका जताई गई है और उनके कोरोना से प्रभावित होने का खुलासा भी हुआ है। हालांकि मध्यप्रदेश के नेशनल पार्क, सेंचुरी और संरक्षित क्षेत्र कोरोना कर्फ्यू लगने के कारण पहले ही बंद किये जा चुके हैं।

जू-अथॉरिटी का अलर्ट
कोरोना को लेकर सेंटल जू-अथॉरिटी ने भी अलर्ट जारी किया है। मुकुदपुर जू एंड टाइगर सफारी के प्रबंधन ने इसकी पृष्टि करते हुए बताया कि जू को कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद से बंद कर दिया गया था। इधर अलर्ट के बाद पन्ना नेशनल पार्क प्रबंधन टास्क फोर्स और रेपिड एक्शन फोर्स का गठन करने जा रहा है। इसमें वन अमले के साथ डॉक्टर और कर्मचारी शामिल होंगे। वे जानवरों में कोरोना के लक्षण का पता लगाएंगे।

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विदेश में मिले केस
कोरोना के संक्रमण से वन्यजीव अछूते नहीं रहे हैं। जून 2020 में न्यूयार्क में बाघों कोरोना के लक्षण मिले थे। वही 8 दिसंबर 2020 में बार्सिलोना में बाधों में संक्रमण मिला था।

चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन मप्र एपीसीसीएफ जे एस चौहान ने बताया कि कोरोना का खतरा बाघों में कम है। नेशनल पार्क और सेंचुरी में काम कर रहे कर्मचारियों में यदि कोरोना के लक्षण दिखते हैं, तो उन्हें प्रवेश नहीं दिया जाता।

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